गुरुवार, 1 दिसंबर 2011

बर्दाश्त...


Stop trying to fit in... when you were born to stand out!!!
इन पंक्तियों का मतलब है कि जब आपका जन्म ही सबसे अलग खड़े रहने के लिए हुआ है तो ढ़र्रे में फिट रहने की कोशिश क्यों करते हैं...कुछ ही दिन पहले मेरे एक मित्र ने इसे अपने जी मेल अकाउंट के स्टेटस में लिखा था.
ये अजीब है लेकिन सच है, हम हमेशा खुद को एडजस्ट करने में लगे रहते हैं फिर वो नौकरी हो, घर हो, समाज हो या कुछ भी हो हम बस अपने आपको फिट करते हैं ताकी जीवन की गाड़ी चलती रहे.
मेरे एक मित्र ने कुछ दिन पहले मुझसे बोला कि बर्दाश्त करना तुम्हारी नियति है.
इन दोनों चीजों में कोई ताल्लुक नही है, लेकिन हम एडजस्ट करने के लिए ही तो बर्दाश्त करते हैं.
मुझे कुछ भी समझ में नही आ रहा है कि कैसे मैं बग़ैर बर्दाश्त किए एडजस्ट करूं यदि मुझे एडजस्ट करना है.
मुझे ये भी समझ में नही आ रहा है कि मैं क्यों एडजस्ट करू..
ये सवाल आपके लिए भी है

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